Barharwa (Sahibganj): बरहरवा अंचल क्षेत्र का नाम पिछले कुछ वर्षों से अवैध पत्थर खनन, अवैध व ओवरलोड परिवहन और चेकनाकों में अवैध वसूली को लेकर लगातार सुर्खियों में रहा है और इन विवादों के केंद्र में बार-बार सामने आया है एक ही नाम, पूर्व अंचल गार्ड हाजिकुल शेख। कभी चेकनाका पर कथित अवैध वसूली का आरोप, कभी ऑडियो वायरल प्रकरण और अब अंचलाधिकारी के साथ खनन क्षेत्र के निरीक्षण तक, हाजिकुल का नाम प्रशासन और पत्थर कारोबारियों के बीच एक संधि सूत्र के तौर पर चर्चा में है।
वसूली के आरोप और वायरल ऑडियो
हाजिकुल शेख का नाम सबसे पहले उस समय विवादों में आया था, जब कोटालपोखर चेकनाका से अवैध वसूली और पैसों के बंटवारे को लेकर उसका एक ऑडियो वायरल हुआ था। इस ऑडियो में तत्कालीन सीओ के रिस्क ना लेने और मजिस्ट्रेट से एक पत्रकार को प्रतिदिन ₹2000 लेने की बात कही गई थी। मामला गंभीर था, क्योंकि इसमें सीधे-सीधे प्रशासनिक अधिकारियों से पत्रकार तक वसूली की रकम पहुँचाने का इशारा था। लेकिन आश्चर्य की बात है कि उस वायरल ऑडियो की न तो आजतक कोई निष्पक्ष जांच हुई, न ही हाजिकुल पर कोई ठोस कार्रवाई।
अवैध कारोबार से गठजोड़ के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हाजिकुल लंबे समय से पत्थर कारोबारियों और अधिकारियों के बीच सेतु की भूमिका निभाता रहा है। क्रशरों व खदान से निकलने वाले ट्रकों पर वसूली, पैसे के बंटवारे में मध्यस्थता, अधिकारीयों और रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों तक को प्रभावित करने की कोशिश, ये सभी बातें बार-बार हाजिकुल के नाम को संदेह के घेरे में खड़ा करती रही हैं।
हाजिकुल के साथ खनन क्षेत्र के निरिक्षण ने खड़े किये नए सवाल
ताज़ा मामला और भी चौंकाने वाला है। गुरुवार को अंचलाधिकारी अनोज कुमार ने विभिन्न पत्थर खदानों व क्रशरों का औचक निरीक्षण किया। आश्चर्य की बात यह रही कि इस निरीक्षण में हाजिकुल शेख को भी साथ ले जाया गया। मामले को लेकर अंचलाधिकारी का तर्क है कि “हाजिकुल को केवल हेल्प के लिए साथ लिया गया।” लेकिन सवाल यह है कि जब अंचल कार्यालय में कई कर्मचारी मौजूद हैं, तो एक विवादित और पूर्व होमगार्ड को ही साथ क्यों ले जाया गया? क्या हाजिकुल अब भी पत्थर कारोबारियों और प्रशासनिक तंत्र के बीच बिचौलिये की भूमिका निभा रहा है? या फिर यह पूरा निरीक्षण केवल दिखावा भर था?
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क्या हाजिकुल को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?
हाजिकुल के खिलाफ अब तक जितने भी आरोप लगे, उन पर न तो कोई ठोस जांच हुई और न ही कार्रवाई। उल्टे वह लगातार कोटालपोखर खनन चेकनाका एवं प्रशासनिक गतिविधियों में सक्रिय दिखाई देता है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है कि क्या हाजिकुल को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? क्यों बार-बार उसे गंभीर आरोपों के बावजूद संवेदनशील जगहों पर देखा जाता है? क्या बरहरवा और कोटालपोखर का अवैध खनन कारोबार वास्तव में हाजिकुल जैसे बिचौलियों के इर्द-गिर्द घूमता है?
मीडिया रिपोर्ट्स, राजनैतिक कार्यकर्त्ता द्वारा जिलाधिकारियों को लिखे गए शिकायत पत्र एवं कोटालपोखर और आसपास के ग्रामीण बताते हैं कि वर्षों से इलाके में अवैध खनन और वसूली का खेल लम्बे समय से चलता आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि अगर जांच निष्पक्ष हो तो कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब होंगे, और हाजिकुल तो केवल बड़े खेल का छोटा खिलाड़ी साबित होगा।
हाजिकुल शेख के नाम से जुड़े विवाद यह साबित करते हैं कि बरहरवा अंचल अंतर्गत कोटालपोखर क्षेत्र में अवैध खनन और वसूली का खेल गहरे नेटवर्क के बिना संभव नहीं है। वायरल ऑडियो की फोरेंसिक जांच, खनन क्षेत्र में उसकी भूमिका, और वसूली नेटवर्क से उसके संभावित संबंधों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
हाजिकुल शेख भले ही फिलहाल पूर्व अंचल गार्ड हैं, लेकिन उनका नाम प्रशासन और खनन कारोबार के बीच वर्तमान कड़ी की तरह जुड़ा हुआ दिखाई देता प्रतीत होता है। प्रशासन अगर सचमुच गंभीर है, तो हाजिकुल के कारनामों पर सिर्फ पर्दा डालने के बजाय उन्हें उजागर करना होगा। वरना यह पूरा मामला केवल अवैध कारोबार के संरक्षण का उदाहरण बनकर रह जाएगा।









