Sahibganj: शेरशाहबादी समुदाय का धरना दूसरे दिन भी जारी, प्रमाण पत्र बहाली तक आंदोलन का ऐलान

Sahibganj: Sher Shahbadi Community's Sit-in Continues for Second Day; Agitation Announced Until Restoration of Certificates

Sahibganj: शेरशाहबादी जाति प्रमाण पत्र को पुनः जारी करने की मांग को लेकर शेरशाहबादी डेवलपमेंट सोसाइटी के बैनर तले बरहरवा प्रखंड मुख्यालय परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में युवा, छात्र और समुदाय के लोग जुटे और स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों तथा राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

धरना को संबोधित करते हुए सोसाइटी के सदस्य अजमाइल शेख ने आरोप लगाया कि सुनियोजित तरीके से शेरशाहबादी समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंडल आयोग और सच्चर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर इस समुदाय को अत्यंत पिछड़ा वर्ग के रूप में आरक्षण का लाभ मिलना शुरू हुआ था, जिससे सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार देखा जा रहा था। लेकिन झारखंड गठन के बाद वर्ष 2012 तक जारी रहने वाला जाति प्रमाण पत्र अचानक बंद कर दिया गया, जिसके बाद से समुदाय लगातार संघर्ष कर रहा है, बावजूद इसके प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई।

वहीं मुखिया मो. इस्तियाक ने कहा कि झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा शेरशाहबादी जाति को पिछड़ा वर्ग सूची में 102 क्रमांक पर अधिसूचित किया गया है, फिर भी अंचल प्रशासन द्वारा इस समुदाय के लोगों को ‘शेख’ जाति का प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शेरशाहाबादी, शेख जाति की उपजाति होने के बावजूद अपनी अलग ऐतिहासिक पहचान, परंपरा और जीवन शैली रखती है। उन्होंने यह भी बताया कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र, पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद तथा झारखंड के पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में इस समुदाय की अलग पहचान है और पूर्व में स्थानीय जांच के आधार पर प्रमाण पत्र निर्गत किया जाता था, जिसे पुनः बहाल किया जाना चाहिए।

धरना के दौरान खराब मौसम भी प्रदर्शनकारियों के हौसले को नहीं डिगा सका। सोमवार रात आई तेज आंधी और बारिश के बावजूद लोग प्रखंड मुख्यालय परिसर में डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब शासन-प्रशासन जनता की आवाज सुनने में विफल हो जाता है, तब आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचता है। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक शेरशाहबादी जाति प्रमाण पत्र फिर से जारी नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

धरना स्थल पर मास्टर मूसा, मुखिया इश्तियाक अहमद, शकील अहमद, सोयेब अख्तर, अजमाइल शेख, तोफाईल शेख, महमूद आलम, मुस्तफिजुर रहमान, नईम अख्तर, फाईम अख्तर, वासिकुल इस्लाम, वाबिदुल्ला, अबुल कलाम, वासिम अकरम, अब्दुल तवाब, परवेज आलम, सद्दाम हुसैन सहित सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

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Author: MOHSIN RAJA

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