Barharwa: महाविद्यालयों में क्लस्टरिंग व्यवस्था के तहत हटाए गए विषयों को पुनः संचालित करने और महत्वपूर्ण विषयों में सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर एनएसयूआई ने शुक्रवार को कुलपति के नाम प्राचार्या को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन एनएसयूआई साहिबगंज जिला अध्यक्ष थॉमस रॉबर्ट के नेतृत्व में सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि बीएसके महाविद्यालय क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर एवं आदिवासी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में क्लस्टरिंग व्यवस्था के आधार पर बंगला, उर्दू और संस्कृत समेत नौ विषयों को हटाया जाना तथा हिंदी, इतिहास और भूगोल जैसे महत्वपूर्ण विषयों में सीटों की संख्या कम करना छात्र हितों के खिलाफ है।
एनएसयूआई जिला अध्यक्ष थॉमस रॉबर्ट ने कहा कि साहिबगंज जैसे पिछड़े क्षेत्र के अधिकांश छात्र-छात्राओं के लिए बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करना आसान नहीं है। ऐसे में स्थानीय महाविद्यालय से विषयों को हटाने और सीटें घटाने से क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था और साक्षरता दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
पूर्व एनएसयूआई कॉलेज अध्यक्ष एवं बीसीए छात्र रहे आखलाकुर रहमान ने कहा कि पहले भी एनएसयूआई के आंदोलन के बाद हिंदी, इतिहास और भूगोल जैसे विषयों में सीटों की संख्या बढ़ाई गई थी, क्योंकि इन विषयों में नामांकन के लिए 600 से 700 तक आवेदन आते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों की अनदेखी करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
एनएसयूआई नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि छात्र विरोधी निर्णयों पर जल्द पुनर्विचार नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा। मौके पर मुंतेख़ाब, अभिषेक, राजा, नगर अध्यक्ष सत्यम यादव, जयप्रकाश, अक्षय, जैनुल, नजीमुद्दीन, शिवम, बंकिम, असफाक, इंतेसर समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
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