Ranchi: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को अब रिम्स के दरवाजे पर दस्तक देने से पहले अनुमति पत्र की जरूरत होगी। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) प्रशासन ने नया फरमान जारी करते हुए मीडिया कर्मियों के प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर कड़ी शर्तें लागू कर दी हैं। अब अस्पताल परिसर में कैमरा उठाने से पहले निदेशक, चिकित्सा अधीक्षक या अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक की मंजूरी लेनी होगी।
यानी अब खबरों की तलाश में पहुंचने वाले पत्रकारों को पहले यह साबित करना होगा कि वे खबर बनाने आए हैं या व्यवस्था बिगाड़ने। अस्पताल में क्या हो रहा है, यह जानने से पहले यह जानना जरूरी होगा कि इसकी अनुमति किसने दी है।
प्रशासन का तर्क है कि मरीजों की गोपनीयता और अस्पताल की व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। तर्क वाजिब भी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या गोपनीयता की रक्षा का सबसे आसान तरीका सूचना के रास्ते ही बंद कर देना है? यदि किसी वार्ड में अव्यवस्था हो, किसी मरीज को परेशानी हो या कोई गंभीर शिकायत सामने आए, तो उसकी तस्वीर और सच्चाई भी अब अनुमति के गलियारों से होकर ही बाहर आएगी।
नए आदेश के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि रिम्स में इलाज के साथ-साथ सूचना का भी रेफरल सिस्टम लागू हो गया है। पहले मरीज डॉक्टर से मिलते थे, अब पत्रकारों को भी अधिकारियों से होकर गुजरना पड़ेगा। फर्क सिर्फ इतना है कि मरीज इलाज के लिए लाइन में लगते हैं और पत्रकार खबर के लिए।
बहरहाल, रिम्स प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था मरीजों की सुरक्षा और निजता के हित में है। वहीं मीडिया जगत में इस आदेश को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि कहीं पारदर्शिता की खिड़कियां बंद कर गोपनीयता की दीवारें तो नहीं खड़ी की जा रही हैं। अब देखना यह है कि खबरें अस्पताल से बाहर निकलती हैं या अनुमति फाइलों में ही भर्ती होकर रह जाती हैं।
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