Sahibganj: चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण एवं पशु प्रेमी सैयद अरशद नसर ने साहिबगंज जेल प्रशासन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न संस्थाओं और राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर न्याय की मांग की है। उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, मुख्यमंत्री, लोकायुक्त, पुलिस महानिदेशक सहित कई अधिकारियों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायत भेजते हुए साहिबगंज जेल गेट पर जमा उनके सामान और नगद राशि की वापसी सुनिश्चित कराने तथा मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अरशद ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि 15 मई को साहिबगंज जेल गेट पर उनके साथ कुछ कारा कर्मियों द्वारा दुर्व्यवहार और बदसलूकी की गई। उन्होंने संबंधित तिथि के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग करते हुए कहा है कि भविष्य में होने वाली किसी भी कानूनी कार्रवाई में यह महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है।
शिकायत में उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि 13 दिसंबर 2025 को साहिबगंज जेल से मधुपुर जेल स्थानांतरण के दौरान जेल गेट पर जमा उनकी नगद राशि, मुलाकाती सामान, मेडिकल रिपोर्ट और बंदी आवेदन पत्र उन्हें वापस नहीं किया गया। उन्होंने इसे असंवैधानिक और नियमों के विरुद्ध बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है।
अरशद ने बताया कि इससे पहले भी 23 मई को उन्होंने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुख्य सचिव, गृह सचिव, जेल आईजी, उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप और न्याय की मांग की थी। उनका कहना है कि अब तक उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
अपने पत्र में उन्होंने न्यायिक हिरासत के दौरान साहिबगंज और मधुपुर जेल में शारीरिक, मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनका सामान वापस नहीं किया जाता और आरोपित कारा पदाधिकारियों, कर्मियों एवं कक्षपालों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अभियान जारी रहेगा।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित जेल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर भेजी गई शिकायतों के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
अरशद द्वारा संघर्ष जारी रखने की घोषणा के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और जांच एजेंसियां इस शिकायत पर क्या कदम उठाती हैं।







