Sahibganj: आदिवासी बहुल तालझारी प्रखंड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। डॉक्टरों की कमी, एंबुलेंस सेवा का अभाव और सीमित चिकित्सा सुविधाओं के कारण यहां आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल की स्थिति ऐसी हो गई है कि मरीजों का इलाज व्यवस्था के बजाय किस्मत के भरोसे हो रहा है।
तालझारी प्रखंड संथाल आदिवासी और आदिम जनजातीय समुदाय की बड़ी आबादी वाला क्षेत्र है। आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं, लेकिन पर्याप्त चिकित्सक और संसाधन नहीं होने के कारण उन्हें अक्सर निराश होना पड़ता है। कई मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद साहिबगंज या अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे मरीजों और ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। वहीं आपातकालीन परिस्थितियों में एंबुलेंस नहीं मिलने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। सड़क दुर्घटना, प्रसव पीड़ा या अन्य गंभीर मामलों में मरीजों को निजी वाहनों के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है, जिससे कई बार इलाज में देरी हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे तो कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। अस्पताल की मौजूदा स्थिति स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल रही है। लोगों का आरोप है कि आदिवासी क्षेत्रों में आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का गंभीर अभाव बना हुआ है।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए जेएलकेएम एसटी मोर्चा के जिला अध्यक्ष राजेंद्र पहाड़िया ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तालझारी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को आज भी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टरों की नियुक्ति, एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की मांग की।
राजेंद्र पहाड़िया ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो क्षेत्र की जनता आंदोलन करने को मजबूर होगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से आदिवासी बहुल क्षेत्रों की स्वास्थ्य समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने की मांग की।
वहीं इस संबंध में तालझारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रंजन ने स्वीकार किया कि अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एक ही डॉक्टर के सहारे पूरे अस्पताल का संचालन किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
अस्पताल की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद अब क्षेत्रवासियों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही इस गंभीर समस्या का समाधान किया जाएगा, ताकि हजारों ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
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