Sahibganj में अफसरशाही हावी! क्या आवेदक को लाभ पहुँचाने डीएमओ ने नियमों को दिखाया ठेंगा?

Bureaucracy runs rampant in Sahibganj! Did the DMO flout the rules to benefit an applicant?
  • आवेदक को ई-ऑक्शन से बचाने 3.136 हेक्टेयर से घटाकर 2.833 करके दिया लीज

Sahibganj: झारखंड में खनन लीज आवंटन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने साहिबगंज जिला खनन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब अब प्रशासन और खनन विभाग दोनों को देना होगा। ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों के अनुसार एक आवेदक द्वारा तीन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल के लिए दिए गए आवेदन को जिला खनन कार्यालय स्तर पर घटाकर तीन हेक्टेयर से नीचे कर दिया गया और इसके बाद उसी आधार पर लीज प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। कैग ने इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।

मामले के अनुसार एक आवेदक ने 02 मार्च 2019 को 3.136 हेक्टेयर रैयती भूमि पर स्टोन माइनिंग लीज के लिए आवेदन किया था। उस समय लागू झारखंड माइनर मिनरल कंसेशन नियमावली के अनुसार तीन हेक्टेयर और उससे अधिक क्षेत्र के लिए माइनिंग लीज का निपटान ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाना था। ऐसे मामलों में सामान्य लीज प्रक्रिया अपनाने का प्रावधान नहीं था।

लेकिन कैग रिपोर्ट के अनुसार जिला खनन पदाधिकारी, साहिबगंज ने आवेदन को अस्वीकार करने अथवा ई-नीलामी प्रक्रिया के लिए अग्रसारित करने के बजाय आवेदन क्षेत्र को 3.136 हेक्टेयर से घटाकर 2.833 हेक्टेयर कर दिया और जून 2019 में उसी क्षेत्रफल के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) जारी कर दिया। इसके बाद अक्टूबर 2019 में पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त हुई और जुलाई 2021 में जिला प्रशासन की मंजूरी के बाद अगस्त 2021 में दस वर्षों के लिए खनन पट्टा निष्पादित कर दिया गया।

ऑडिट के दौरान सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि आवेदक ने स्वयं क्षेत्रफल कम करने का अनुरोध किया था। अर्थात आवेदन क्षेत्र में बदलाव जिला खनन कार्यालय स्तर पर किया गया प्रतीत होता है। कैग ने इस कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए टिप्पणी की कि यदि मूल आवेदन 3.136 हेक्टेयर का था तो उसे नियमों के अनुरूप ई-ऑक्शन प्रक्रिया के अंतर्गत भेजा जाना चाहिए था।

रिपोर्ट का निष्कर्ष और भी गंभीर है। कैग ने कहा कि आवेदन क्षेत्र में की गई कटौती से यह प्रतीत होता है कि लीज को ई-ऑक्शन प्रक्रिया से बाहर रखने का मार्ग तैयार किया गया। ऑडिट ने यह भी दर्ज किया कि आवेदन क्षेत्र में परिवर्तन कर लीज प्रक्रिया को आगे बढ़ाना सक्षम अधिकारियों को वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ रखने और आवेदक को अनुचित लाभ पहुंचाने वाला कदम माना जा सकता है। रिपोर्ट ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

Bureaucracy runs rampant in Sahibganj! Did the DMO flout the rules to benefit an applicant?

खनन मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि कोई आवेदन तीन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के लिए प्राप्त होता है और बाद में बिना वैध कारण उसके क्षेत्रफल में कटौती कर दी जाती है, तो यह केवल तकनीकी संशोधन का मामला नहीं रह जाता। इससे यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या नियमों की मूल भावना को दरकिनार कर किसी विशेष आवेदक को लाभ पहुंचाया गया।

सबसे बड़ा सवाल तत्कालीन जिला खनन पदाधिकारी की भूमिका को लेकर उठ रहा है। यदि आवेदक की ओर से कोई संशोधित आवेदन नहीं था, तो क्षेत्रफल घटाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया? क्या इसके लिए कोई विधिक आदेश, तकनीकी रिपोर्ट या सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मौजूद थी? यदि नहीं, तो फिर यह निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया?

कैग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए। इसके बावजूद रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद भी अब तक किसी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। यही कारण है कि अब जिले में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या कैग की इतनी गंभीर टिप्पणियों के बावजूद तत्कालीन जिला खनन पदाधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू होगी? क्या उनसे यह पूछा जाएगा कि तीन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के आवेदन को किस आधार पर घटाया गया? और क्या सरकार यह आकलन करेगी कि यदि ई-ऑक्शन की प्रक्रिया अपनाई जाती तो राज्य को कितना अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता था?

साहिबगंज में खनन लीज से जुड़े मामलों पर कैग की लगातार टिप्पणियां केवल प्रक्रियागत त्रुटियों की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि वे उस प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करती हैं जिसके भरोसे राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन किया जाता है। अब निगाहें राज्य सरकार, खान एवं भूतत्व विभाग और सतर्कता एजेंसियों पर हैं कि वे कैग की इन गंभीर टिप्पणियों को केवल रिपोर्ट का हिस्सा मानती हैं या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाती हैं।

(Note: मुख्य तस्वीर वास्तविक नहीं है, AI जनरेटेड है।)

ये भी पढ़ें: Sahibganj: डीम्ड रिजेक्टेड आवेदन को मिली खदान! सवालों के घेरे में तत्कालीन DC और DMO की भूमिका

WASIM AKRAM
Author: WASIM AKRAM

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