Ranchi: सुप्रीम कोर्ट से आलमगीर आलम और संजीव लाल को जमानत, ईडी की आपत्तियों के बावजूद मिली राहत

Ranchi: Alamgir Alam and Sanjeev Lal Granted Bail by Supreme Court; Relief Secured Despite ED's Objections

Ranchi: झारखंड के बहुचर्चित टेंडर कमीशनखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके आप्त सचिव रहे संजीव लाल को बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।

सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत में जोरदार विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि मामला बेहद गंभीर प्रकृति का है और यह व्यापक स्तर पर कमीशनखोरी तथा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। ईडी ने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट में अब तक चार महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज नहीं हो सके हैं। ऐसे में आरोपियों को जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका बनी हुई है।

वहीं आलमगीर आलम की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनकी उम्र 77 वर्ष है और वह लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनके पास से कोई नकद राशि या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई थी। साथ ही वह दो वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद हैं। इन तथ्यों को देखते हुए उन्हें राहत दिए जाने की मांग की गई।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आलमगीर आलम और संजीव लाल को जमानत देने का आदेश पारित कर दिया। इससे पहले 2 अप्रैल को हुई सुनवाई में भी ईडी ने जमानत याचिका का विरोध किया था। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि एक महीने के भीतर चार महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं। जिन गवाहों के बयान दर्ज होने थे उनमें मुन्ना सिंह, संतोष कुमार उर्फ रिंकू, संपत्ति विक्रेता स्वर्णजीत सिंह गिल और बिंदेश्वर राम शामिल हैं। अदालत ने उसी समय एक महीने बाद दोबारा सुनवाई की तिथि निर्धारित की थी, जिसके तहत सोमवार को मामले पर सुनवाई हुई।

गौरतलब है कि यह मामला पिछले वर्ष मई महीने में उस समय सुर्खियों में आया था जब ईडी ने तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम के आप्त सचिव संजीव लाल और उसके करीबी जहांगीर आलम समेत अन्य ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। छह मई 2024 को हुई इस कार्रवाई के दौरान जहांगीर आलम के ठिकाने से 32.20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। वहीं संजीव लाल के आवास से 10.05 लाख रुपये नकद के अलावा एक डायरी भी मिली थी, जिसमें कथित कमीशन की रकम और हिस्सेदारी का विस्तृत हिसाब-किताब दर्ज था। डायरी में संबंधित लोगों के नामों के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई थी।

ईडी ने बरामद नकदी और दस्तावेजों के आधार पर सात मई 2024 को संजीव लाल और जहांगीर आलम को गिरफ्तार किया था। इसके बाद तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को पूछताछ के लिए समन भेजा गया। दो दिनों तक चली लंबी पूछताछ के बाद 15 मई 2024 की देर रात ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

जांच एजेंसी अब तक इस मामले में कई बड़ी संपत्तियां जब्त कर चुकी है। ईडी के अनुसार संजीव लाल की लगभग 4.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है, जबकि जहांगीर आलम के घर से बरामद 32.20 करोड़ रुपये नकद भी एजेंसी ने जब्त कर लिए हैं। इसके अलावा इस मामले में तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम की करीब 39 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की जा चुकी है। मामले की सुनवाई अभी जारी है और ईडी की जांच भी आगे बढ़ रही है।

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Author: WASIM AKRAM

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