Ranchi: झारखंड (Jharkhand) सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता लाने और वास्तविक जरूरतमंदों तक खाद्यान्न पहुंचाने के लिए अपात्र राशन कार्डधारियों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। राज्य में गलत तरीके से सरकारी राशन का लाभ उठा रहे 8 लाख से अधिक लोगों को चिन्हित किया गया है, जिनका भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। जांच में अपात्र पाए जाने वाले लाभुकों के राशन कार्ड रद्द कर दिए जाएंगे। इतना ही नहीं, उनसे अब तक लिए गए राशन की बाजार दर पर वसूली, ब्याज सहित की जाएगी और आवश्यकतानुसार कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 8,02,685 ऐसे राशन कार्डधारियों की पहचान की गई है, जिनकी पात्रता संदिग्ध है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जिन्होंने पिछले छह महीने से लेकर एक वर्ष तक राशन का उठाव नहीं किया है। अब तक 4,61,025 कार्डधारियों का भौतिक सत्यापन पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष मामलों की जांच जारी है।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। राज्य में 12,284 ऐसे एकल राशन कार्ड पाए गए हैं, जिनमें कार्डधारी की उम्र 100 वर्ष से अधिक या 18 वर्ष से कम दर्ज है। वहीं 21,750 डुप्लीकेट राशन कार्डधारियों की भी पहचान हुई है, जिनका सत्यापन अभी बाकी है। डुप्लीकेट कार्डों के सबसे अधिक मामले पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में पाए गए हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिन लोगों ने गलत जानकारी देकर राशन कार्ड बनवाया है, उन्हें पहले नोटिस जारी किया जाएगा। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो उनका राशन कार्ड रद्द कर दिया जाएगा। इसके बाद सरकारी अनाज के दुरुपयोग की भरपाई के लिए बाजार मूल्य के आधार पर वसूली की जाएगी और आवश्यकतानुसार कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
सरकार की इस कार्रवाई का एक बड़ा उद्देश्य लंबे समय से लंबित पात्र आवेदकों को योजना का लाभ दिलाना भी है। वर्तमान में राज्य में नए राशन कार्ड और नाम जोड़ने से संबंधित 5.50 लाख से अधिक आवेदन लंबित हैं। इनमें 1,94,669 नए राशन कार्ड के आवेदन तथा 3,60,178 पुराने कार्डों में नाम जोड़ने के आवेदन शामिल हैं। फर्जी और निष्क्रिय कार्डों को हटाने के बाद इन आवेदनों के निस्तारण का रास्ता साफ होगा।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत झारखंड में वर्तमान समय में 1,16,636 सीटें खाली हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल उन लाखों पात्र परिवारों के लिए राहत साबित हो सकती है जो लंबे समय से राशन कार्ड बनने या परिवार के सदस्यों का नाम जुड़ने का इंतजार कर रहे हैं।
राज्य सरकार का मानना है कि अपात्र लाभुकों की पहचान कर उन्हें योजना से बाहर करने से न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रुकेगा, बल्कि वास्तविक गरीब और जरूरतमंद परिवारों को उनका अधिकार भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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