Ranchi: दीपावली की आहट के साथ ही राजधानी रांची के बाजार रंग-बिरंगी सजावट से गुलजार हो गए हैं। घरों के मुख्य द्वार को आकर्षक बनाने के लिए इस बार पारंपरिक तोरण लोगों की पहली पसंद बनते नजर आ रहे हैं। चाइनीज लड़ियों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सजावट के बीच मोती, रिबन, फूल, धागे और ग्लास वर्क से तैयार तोरण अपनी अलग चमक बिखेर रहे हैं। बाजारों में दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद से आए आधुनिक एवं पारंपरिक डिजाइन के तोरण-लटकन की अच्छी मांग है। वहीं, स्थानीय कारीगरों और कुम्हारों की मेहनत से तैयार मिट्टी के घरौंदे, ग्वालिन की प्रतिमाएं और दीये भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
राजधानी के हरमू रोड, रातू रोड, मेन रोड, चुटिया, डोरंडा, लालपुर, कोकर, हिनू और कुम्हार टोलियों में दीपावली की खरीदारी को लेकर रौनक बढ़ गई है। बाजारों में छोटी-बड़ी दुकानों के साथ सड़क किनारे लगे अस्थायी स्टॉल पर भी सजावटी सामान की भरमार है। खासकर घर के मुख्य द्वार पर लगाने वाले तोरण की कई आकर्षक वैरायटी उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 50 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक है।
सेवा सदन अस्पताल के पास पिछले 15 वर्षों से हाथों से बने सजावटी सामान बेच रहीं बरती देवी बताती हैं कि वह अपने परिवार और सहयोगियों के साथ तैयार किए गए तोरण द्वार, फूलों की माला, धागे के झालर और अन्य सजावटी सामान लेकर हर साल यहां आती हैं। इस बार भी ग्राहकों की पसंद के अनुसार अलग-अलग आकार और डिजाइन के तोरण उपलब्ध हैं। उनके अनुसार, 15 फीट का तोरण द्वार 1500 रुपये, 10 फीट का 1000 रुपये और 12 फीट का 1200 रुपये में बिक रहा है। वहीं, सजावटी मालाओं की कीमत 150, 200 और 300 रुपये जोड़ा है। कपड़े के झालरदार तोरण 150 से 200 रुपये और प्लास्टिक के पत्तों के आकार वाले तोरण महज 50 रुपये तक में उपलब्ध हैं।
पारंपरिक मिट्टी के घरौंदों की भी बढ़ी मांग
दीपावली के बाजार में बच्चों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले मिट्टी के पारंपरिक घरौंदे भी नए रंग-रूप में नजर आ रहे हैं। इस बार बाजार में दोमंजिला, नक्काशीदार और आकर्षक डिजाइन वाले घरौंदे उपलब्ध हैं। चंदनक्यारी, कोलकाता और सिलीगुड़ी के कारीगरों की महीनों की मेहनत इन कलाकृतियों में दिखाई दे रही है। पारंपरिक मिट्टी के घरौंदों के साथ घंटाघर और देवी-देवताओं की मूर्तियां भी ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं।
चंदनक्यारी के कारीगर कमल बताते हैं कि गुवई नदी की विशेष मिट्टी से उनका पूरा परिवार मिलकर करीब छह महीने पहले से ही घरौंदे, घंटाघर और विभिन्न प्रकार की मूर्तियां तैयार करने में जुट जाता है। मिट्टी को आकार देने से लेकर उसकी सजावट और रंगाई तक हर काम में काफी मेहनत लगती है। उनका कहना है कि पारंपरिक मिट्टी के उत्पादों की मांग आज भी बनी हुई है और दीपावली के अवसर पर इनकी बिक्री की अच्छी उम्मीद रहती है।
वहीं, हरमू नाला के पास दुकान लगाने वाली सोनी प्रजापति बताती हैं कि इस वर्ष उन्होंने एक लाख से अधिक दीये और आकर्षक मिट्टी के घरौंदे तैयार किए हैं। दीपावली को लेकर ग्राहकों में उत्साह है और लोग पारंपरिक सजावटी सामान की खरीदारी कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, इस दीपावली रांची के बाजारों में आधुनिक सजावट के साथ पारंपरिक हस्तशिल्प का भी खास आकर्षण देखने को मिल रहा है। चाइनीज लड़ियों की चमक के बीच हाथों से तैयार तोरण, मिट्टी के घरौंदे और दीये न केवल घरों की सुंदरता बढ़ा रहे हैं, बल्कि स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक कला को भी नई पहचान दे रहे हैं।
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