Barharwa: साहिबगंज जिले में तेज रफ्तार भारी वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को बरहरवा प्रखंड के बरारी क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में तेज रफ्तार ट्रेलर की चपेट में आने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर जिले में बेलगाम दौड़ रहे ट्रकों और ट्रेलरों की रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रेलर संख्या जेएच 16 एच 0025 ने बाइक सवारों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में आयशा बीबी (45 वर्ष), उनके पुत्र इस्माइल शेख उर्फ लालू (22 वर्ष) तथा पुत्री रूली खातून उर्फ फातिमा (18 वर्ष) की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सभी मृतक मिर्जापुर पंचायत के साहेबडांगा गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। वहीं एक अन्य घायल का उपचार जारी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बाइक फरक्का की ओर से बरहरवा आ रही थी, जबकि पीछे से तेज रफ्तार में आ रहा ट्रेलर अचानक अनियंत्रित होकर बाइक सवारों पर चढ़ गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने बरहरवा-फरक्का मुख्य सड़क को करीब डेढ़ घंटे तक जाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की।
सूचना मिलने पर बरहरवा थाना प्रभारी सुमित कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर सड़क जाम समाप्त कराया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर साहिबगंज जिले में लगातार हो रही ट्रक और ट्रेलर दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासन और परिवहन विभाग कब जागेगा? जिले के बरहरवा, राजमहल, उधवा, बोरियो, तालझारी, साहिबगंज नगर क्षेत्र समेत कई इलाकों में प्रतिदिन भारी वाहन तेज रफ्तार से दौड़ते देखे जा सकते हैं। सड़क सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जाती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अक्सर केवल खानापूर्ति ही नजर आती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ प्रभावी अभियान नहीं चलाया जाता। कई स्थानों पर स्कूल, बाजार और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से भी भारी वाहन बेकाबू गति से गुजरते हैं, जिससे आम लोगों की जान हर समय जोखिम में बनी रहती है।
जिले में बीते वर्षों के दौरान ट्रक और ट्रेलर से जुड़े हादसों में दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन न तो स्थायी गति नियंत्रण की व्यवस्था की गई और न ही संवेदनशील मार्गों पर नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सकी। ऐसे में बरारी की यह दर्दनाक घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता का प्रतीक बनकर सामने आई है।
अब देखना यह होगा कि तीन जिंदगियां लील लेने वाले इस हादसे के बाद प्रशासन और परिवहन विभाग केवल जांच और आश्वासन तक सीमित रहती हैं या फिर जिले में बेलगाम दौड़ रहे भारी वाहनों पर वास्तव में कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई करती हैं।
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