मुहर्रम को लेकर Sahibganj में बढ़ा उत्साह, ताजिया सजाने की होड़; शकील मिस्त्री बोले- इस बार पहले से ज्यादा खूबसूरत होगा ताजिया

Enthusiasm for Muharram rises in Sahibganj; a race to decorate Tazias ensues; Shakeel Mistri says the Tazia will be more beautiful than ever this time.

Sahibganj: इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम के आगमन के साथ ही साहिबगंज जिले में धार्मिक आस्था और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। हबीबपुर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ताजिया निर्माण और उसे आकर्षक स्वरूप देने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। ताजिया कमेटियों के सदस्य, युवा और बच्चे पूरे उत्साह के साथ तैयारियों में जुटे हैं तथा इस बार पहले से अधिक भव्य और आकर्षक ताजिया बनाने की होड़ लगी हुई है।

मुहर्रम इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो कर्बला की धरती पर हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है। यह महीना त्याग, बलिदान, सब्र, इंसानियत और न्याय के लिए संघर्ष का संदेश देता है। मुहर्रम के दौरान आयोजित मजलिस, मातम और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से इमाम हुसैन की कुर्बानियों को याद किया जाता है।

हबीबपुर के प्रसिद्ध ताजिया कारीगर शकील मिस्त्री पिछले लगभग 20 वर्षों से ताजिया निर्माण की कला से जुड़े हुए हैं। अपनी उत्कृष्ट कारीगरी के कारण वह कई बड़े शहरों में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। शकील मिस्त्री ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी ताजिया को पहले से अधिक खूबसूरत, आकर्षक और पारंपरिक स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ताजिया केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत का हिस्सा है, इसलिए इसके निर्माण में बारीक कलात्मक कार्य और पारंपरिक शैली का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

हबीबपुर ताजिया कमेटी के सचिव अमीर हुसैन उर्फ बिल्लू ने सभी लोगों से मुहर्रम का पर्व शांति, सौहार्द और भाईचारे के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अखाड़ों में पारंपरिक लाठी-डंडा और अन्य खेलों का प्रदर्शन अनुशासन के साथ किया जाए तथा किसी भी प्रकार के विवाद से बचते हुए क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहजीब को कायम रखा जाए। उन्होंने युवाओं से संयम और जिम्मेदारी के साथ पर्व में भाग लेने का आग्रह भी किया।

इस बीच स्थानीय लोगों ने प्रशासन से एक पुरानी परंपरा को फिर से शुरू करने की मांग भी उठाई है। लोगों का कहना है कि पहले उत्कृष्ट ताजिया कमेटियों और अखाड़ा कमेटियों को प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाता था, जिससे कलाकारों और युवाओं का उत्साह बढ़ता था। पिछले कुछ वर्षों से यह परंपरा बंद हो गई है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासन इस सम्मान समारोह को दोबारा शुरू करे तो ताजिया निर्माण से जुड़े कारीगरों और अखाड़ा कमेटियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा जिले की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को नई पहचान मिलेगी।

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Author: MOHSIN RAJA

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