Sahibganj: बोरियो-तीनपहाड़ मुख्य मार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया है। इस दुर्घटना में पुलिस कांस्टेबल हृदय कुमार सरकार समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के समय कांस्टेबल हृदय कुमार सरकार ने हेलमेट पहनने के बजाय उसे अपनी बुलेट मोटरसाइकिल के लेग गार्ड में टांग रखा था। वहीं दूसरी बाइक पर सवार युवक भी बिना हेलमेट के सफर कर रहे थे। इतना ही नहीं, एक बाइक पर तीन युवक सवार थे। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सभी ने सुरक्षा नियमों का पालन किया होता तो शायद यह दुर्घटना जानलेवा साबित नहीं होती।
हादसे में जान गंवाने वाले तीनपहाड़ के वृंदावन निवासी साहिल की शादी महज 20 दिन पहले ही बरहेट में हुई थी। दुर्घटना की सूचना मिलते ही उसकी पत्नी सदर अस्पताल पहुंची, जहां पति का शव देखकर वह बेसुध होकर रोने लगी। परिवार और रिश्तेदारों की सांत्वना भी उसके दर्द को कम नहीं कर सकी। एक छोटी सी चूक ने उसकी नई-नवेली जिंदगी को गहरे अंधकार में धकेल दिया।
वृंदावन गांव में मृतक साहिल और मिराज के घरों पर मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। दोनों परिवारों की आजीविका मुख्य रूप से उन्हीं पर निर्भर थी। एक ही हादसे ने परिवारों की खुशियां छीन लीं और पूरे गांव को गमगीन कर दिया। घटना के बाद गांव के अधिकांश लोग सदर अस्पताल पहुंचे हुए थे, जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल बना रहा।
उधर, पोस्टमार्टम के बाद पुलिस कांस्टेबल हृदय कुमार सरकार का पार्थिव शरीर पुलिस लाइन लाया गया, जहां मेजर रोहित कुमार दुबे के नेतृत्व में पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। इस दौरान पुलिस मेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष राम प्रसाद, सचिव नवीन मुर्मू, केंद्रीय सचिव सुनील शर्मा समेत कई अधिकारी और जवान मौजूद रहे। सभी ने नम आंखों से अपने साथी को अंतिम विदाई दी।

इस बीच हादसे में मृतक साहिल के परिजनों ने सदर अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण उचित उपचार नहीं मिल सका। सामाजिक कार्यकर्ता सत्य प्रकाश सिंह ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि घायल को अस्पताल लाए जाने के समय ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मौजूद नहीं थे, जिससे उपचार में देरी हुई। हालांकि इस संबंध में अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह हादसा न केवल सड़क सुरक्षा नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
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