Rajmahal/Ranchi: रांची (Ranchi) में आयोजित प्रबुद्ध नागरिक संवाद कार्यक्रम सह ‘विकसित भारत 2047’ संकल्प बैठक के दौरान संथाल परगना को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। हिन्दू धर्म रक्षा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष संत कुमार घोष ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कार्यक्रम में देश और राज्य के विकास, सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा तथा आंतरिक स्थिरता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
संत कुमार घोष ने बताया कि कार्यक्रम में उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को एक लिखित ज्ञापन सौंपते हुए संथाल परगना क्षेत्र की बदलती जनसांख्यिकीय स्थिति (डेमोग्राफी) को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है, क्योंकि इसका प्रभाव सामाजिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर पड़ सकता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस विषय पर पत्र भेजने की जानकारी देते हुए कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन के लिए संथाल परगना, पश्चिम बंगाल के मालदा जिला तथा बांग्लादेश सीमा से सटे कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।
संत कुमार घोष के अनुसार ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि सीमाओं की सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और प्रशासनिक दक्षता भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के समुचित विकास और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेष प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भी देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता और सीमावर्ती क्षेत्रों के सुदृढ़ीकरण को समान महत्व दिया जाना चाहिए।
बैठक में शामिल लोगों ने विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का संकल्प भी लिया। वहीं संथाल परगना को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की मांग को लेकर क्षेत्र में नई चर्चा शुरू हो गई है।







